Kailash Samhita
महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘कैलास सहिंता’, जिसे शिवपुराण का ही एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है, में भगवान शिव, ‘ऊं’ के आध्यात्मिक महत्त्व व संन्यास जीवन की तेईस अध्यायों में विस्तारपूर्वक
चर्चा की गई है|
मुख्य सेलिंग पॉइंट्स
कैलास सहिंता में शिवतत्त्व की महिमा का वर्णन किया गया है।
इसमें भगवान शिव के निवास स्थान ‘कैलास पर्वत’ से जुड़ी रहस्यमयी बातों का उद्घाटन किया गया है|
इस कृति में प्रणव (ऊं) के दार्शनिक अर्थ की विस्तृत विवेचना की गई है| जिससे समूचे मानव जगत में ऊर्जा का संचार होता है|
यह अठारह महापुराणों में अद्वितीय स्थान रखता है जिसकी तुलना भगवान शिव के समस्त ग्रंथों में सर्वोपरि है|
आत्मा और परमात्मा के मिलन के संदर्भ में कैलाश संहिता अद्वैतवाद की व्याख्या करने में सफलता पाती है|
इसमें भक्ति व ज्ञान के माध्यम से हृदय और बुद्धि के बीच अद्भुत समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया है|
यह ग्रंथ मानव संसार को जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
इस रचना में विभिन्न पात्रों द्वारा स्थापित किए गए संवाद इसे और भी गहनता प्रदान करते हैं|
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