बराबर
बराबर की गुफाएँ— भारत की सबसे पुरानी पत्थर-तराशी गुफाएँ, जिन्होंने ई. एम. फ़ोर्स्टर को ए पैसेज टू इंडिया लिखने की प्रेरणा दी — आज भी अपने राज़ छुपाए बैठी हैं।
सूरज, सौरव, गौतम और गोलू — चार बचपन के दोस्त — एक आम सुबह इन्हीं गुफाओं की सैर पर निकलते हैं। पहले बाबा सिद्धनाथ का मंदिर, फिर नीचे की गुफाएँ — बस इतनी-सी योजना थी।
पर एक गुफा में क़दम रखते ही, वह योजना ख़त्म हो जाती है। फ़र्श उनके पैरों तले खुल जाता है, और चारों दोस्त अलग-अलग, घुप्प अँधेरे में, पहाड़ के पेट में जा गिरते हैं — जहाँ दीवारों पर हज़ारों साल पुराने चित्र मानो उनकी क़िस्मत पहले से ही उकेर चुके हैं।
अब हर दोस्त को अकेले अँधेरे से लड़ना है — कोई आस्था के सहारे, कोई गणित के, कोई बस इस भरोसे पर कि बाहर कोई इंतज़ार कर रहा है। और हर मोड़ पर वही सवाल लौटता है, जो सदियों पहले आजीवक साधु पूछते थे — क्या सब कुछ पहले से तय है, या हम ख़ुद अपना रास्ता गढ़ते हैं?
बराबर — दोस्ती, आस्था और नियति की एक ऐसी कहानी, जो उतनी ही सच्ची है जितनी काल्पनिक।
Contacter le commerçant pour commander :