डर, साहस और भी बहुत कुछ...

डर, साहस और भी बहुत कुछ...

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एक IAS अधिकारी की ये यादें उनमे उभरते डर और उनसे उबरने के सफ़र को दिखाती हैं। इसमें स्थानीय नेता की धमकी के बावजूद अपने सरकारी फ़र्ज़ पर डटे रहने, अपने साथ हुई नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ अदालती लड़ाई लड़ने, उदयपुर की ऐतिहासिक झील में होटल बनाने के मामले में अदालतों की भूमिका, और नौकरशाही व भारतीय लोकतंत्र की व्यापक स्थिति पर विचार करने जैसी बातें शामिल हैं। यह ज़मीनी स्तर पर प्रशासन की असलियत, कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सच्चा ब्यौरा देती है और भविष्य के प्रशासकों को जन-सेवा के बारे में अहम जानकारी देती है।

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